सोम प्रदोष व्रत 13 जुलाई 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, व्रत का महत्व और भगवान शिव की कृपा पाने के उपाय
Som Pradosh Vrat 13 July 2026: जानें 13 जुलाई 2026 को पड़ने वाले सोम प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत का धार्मिक महत्व, भगवान शिव का अभिषेक करने की सही विधि, महामृत्युंजय मंत्र, शिव पूजा के नियम, क्या करें और क्या न करें। साथ ही जानें प्रदोष काल में पूजा का महत्व और शिव कृपा प्राप्त करने के आसान उपाय।

सोम प्रदोष व्रत 13 जुलाई 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत का महत्व, मंत्र और भगवान शिव की कृपा पाने का उपाय
सनातन धर्म में सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। 13 जुलाई 2026, सोमवार को पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, शिवलिंग का अभिषेक करने और प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक आस्था पर आधारित हैं।
सोम प्रदोष व्रत 2026 कब है?
व्रत: सोम प्रदोष व्रत
तिथि: 13 जुलाई 2026, सोमवार
पक्ष: आषाढ़ कृष्ण पक्ष
आराध्य देव: भगवान शिव और माता पार्वती
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। जब इसी दिन त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल आता है, तब इसे सोम प्रदोष कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से—
भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
वैवाहिक जीवन में मधुरता आने की मान्यता है।
करियर और व्यवसाय में आने वाली बाधाएं दूर होने की प्रार्थना की जाती है।
मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
1. प्रातः स्नान करें
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ, सात्विक वस्त्र धारण करें।
2. व्रत का संकल्प लें
भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लें।
3. प्रदोष काल में पूजा करें
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।
4. शिवलिंग का अभिषेक करें
शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद स्वच्छ जल अर्पित करें।
5. पूजा सामग्री अर्पित करें
बेलपत्र
धतूरा
सफेद फूल
चंदन
अक्षत
धूप
दीपक
फल और मिठाई
6. मंत्र जाप करें
इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें—
ॐ नमः शिवाय
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शिव आरती करें
पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
सोम प्रदोष व्रत में क्या करें?
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र और जल अर्पित करें।
शिव चालीसा, शिव पुराण या रुद्राष्टक का पाठ करें।
जरूरतमंद लोगों को अन्न और वस्त्र का दान करें।
दिनभर सात्विक आहार और संयम का पालन करें।
सोम प्रदोष व्रत में क्या न करें?
मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
झूठ, क्रोध और विवाद से बचें।
किसी का अपमान न करें।
नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

