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25 जुलाई 2026 का पंचांग: शुभ मुहूर्त, राहुकाल, तिथि और आज का पंचांग

25 जुलाई 2026 का पंचांग पढ़ें। जानें श्रावण शुक्ल दशमी, स्वाती नक्षत्र, वैधृति योग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय, सूर्यास्त और धार्मिक महत्व।

25 जुलाई 2026 का पंचांग: शुभ मुहूर्त, राहुकाल, तिथि और आज का पंचांग
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पंचांग विवरण

दिन: शनिवार

तिथि: श्रावण शुक्ल दशमी

पक्ष: शुक्ल पक्ष

मास: श्रावण मास

विक्रम संवत: 2083

सूर्य राशि: कर्क

चंद्र राशि: वृश्चिक

ऋतु: वर्षा ऋतु

सूर्योदय: प्रातः 05:42 बजे

सूर्यास्त: सायं 07:36 बजे

तिथि

श्रावण शुक्ल दशमी

दशमी तिथि धर्म, विजय, शुभ कार्यों और नई योजनाओं की शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। इस दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य, यात्रा और धार्मिक अनुष्ठान करना विशेष फलदायी माना जाता है। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नक्षत्र

स्वाती नक्षत्र

स्वाती नक्षत्र स्वतंत्रता, प्रगति, व्यापार, ज्ञान और नए अवसरों का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में व्यापार, निवेश, शिक्षा और नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।

योग

वैधृति योग

वैधृति योग में महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि पूजा-पाठ, जप, तप, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय शुभ माना जाता है।

करण

गर करण

वणिज करण

दोनों करण व्यापार, यात्रा, शिक्षा, निवेश और सामान्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:55 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:46 बजे से 03:42 बजे तक

अमृत काल: प्रातः 09:10 बजे से 10:45 बजे तक

अशुभ समय

राहुकाल: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक

यमगण्ड काल: दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक

गुलिक काल: प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक

धार्मिक महत्व

शनिवार का दिन भगवान शनि देव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रावण मास में भगवान शिव और शनि देव की संयुक्त पूजा करने से ग्रह दोषों में कमी आती है तथा जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने की मान्यता है। इस दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें तथा शनि देव को सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

शनिवार के उपाय

भगवान शिव का गंगाजल और जल से अभिषेक करें।

शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें।

शनि देव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

"ॐ नमः शिवाय" और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें।

काले तिल, उड़द की दाल, लोहे की वस्तु या काले वस्त्र का दान करें।

पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर सात परिक्रमा करें।

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