26 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें कामिका एकादशी तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
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26 जुलाई 2026 का पंचांग (रविवार)
पंचांग विवरण
दिन: रविवार
तिथि: श्रावण शुक्ल एकादशी
पक्ष: शुक्ल पक्ष
मास: श्रावण मास
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: कर्क
चंद्र राशि: वृश्चिक
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:43 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:36 बजे
तिथि
श्रावण शुक्ल एकादशी (कामिका एकादशी)
श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। यह भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने तथा दान-पुण्य करने से पापों का नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व रहता है।
नक्षत्र
विशाखा नक्षत्र
विशाखा नक्षत्र सफलता, उन्नति, परिश्रम और लक्ष्य प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए धार्मिक कार्य, व्यापार, शिक्षा और नई योजनाएं शुभ फल प्रदान करती हैं।
योग
प्रीति योग
प्रीति योग शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। इस योग में पूजा-पाठ, दान, विवाह संबंधी चर्चा, व्यापार, निवेश और नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। यह योग रिश्तों में मधुरता और सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाता है।
करण
विष्टि (भद्रा) करण
बव करण
भद्रा काल में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से बचना उचित माना जाता है। भद्रा समाप्त होने के बाद शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पूजा-पाठ, जप और साधना के लिए यह समय अनुकूल माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:56 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:47 बजे से 03:43 बजे तक
अमृत काल: प्रातः 08:50 बजे से 10:25 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: सायं 04:30 बजे से 06:00 बजे तक
यमगण्ड काल: दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक
धार्मिक महत्व
रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा करने के साथ कामिका एकादशी का व्रत रखने का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प और पंचामृत अर्पित करें। साथ ही भगवान शिव का जलाभिषेक करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय", "ॐ नमः शिवाय" तथा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
रविवार के उपाय
भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले पुष्प अर्पित करें।
भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें।
सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें।
जरूरतमंद लोगों को अन्न, गुड़, गेहूं या पीले वस्त्र का दान करें।
एकादशी व्रत का पालन करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।

